देहरादून(हरिशंकर सैनी)।उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, मुख्य परिसर देहरादून के प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य, एसोसिएट प्रोफेसर और शैक्षणिक अधीक्षक डॉ. राजीव कुरेले को आयुर्वेद शिक्षा, शोध और जन-जागरूकता में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए 8th टीचर ऑफ द ईयर–2025 (मेडिकल कैटेगरी) पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें 6th देहरादून इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल 2025 के समापन समारोह में प्रदान किया गया, जो विज्ञान प्रभा भवन, यूकास्ट परिसर में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में अनेक शिक्षाविद, वैज्ञानिक और विभिन्न संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
समारोह की अध्यक्षता उच्च शिक्षा परिषद उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र भसीन ने की। इस अवसर पर कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डी. एस. रावत, एम्स ऋषिकेश की निदेशक डॉ. मीनू सिंह, वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी और पूर्व पीसीसीएफ जयराज सिंह, उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रोफेसर ओ. पी. नेगी, उच्च शिक्षा विभाग एवं यूकास्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डी. पी. उनियाल, दिव्य हिमगिरि के संस्थापक कुंवर राज अस्थाना, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गोपेश्वर के निदेशक अमित अग्रवाल और डीआईटी विश्वविद्यालय के डीन प्रोफेसर नवीन सिंगला विशेष रूप से उपस्थित रहे। चयन प्रक्रिया 6th राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और कार्यक्रम के चेयरमैन एन. रवीशंकर की देखरेख में संपन्न हुई।

डॉ. राजीव कुरेले लंबे समय से आयुर्वेदिक शिक्षा, चिकित्सा अनुसंधान और समाज में आयुष पद्धति के वैज्ञानिक महत्व को प्रसारित करने के लिए सक्रिय रहे हैं। उन्होंने राज्य और देशभर में सैकड़ों स्वास्थ्य शिविर, निशुल्क परामर्श कार्यक्रम और जन-जागरूकता अभियानों का संचालन किया है। आयुर्वेद को आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रस्तुत करने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के माध्यम से भी उन्होंने आयुर्वेद के प्रचार में उल्लेखनीय योगदान दिया है। दूरदर्शन के लोकप्रिय कार्यक्रम संजीवनी, जीवन शैली और अन्य स्वास्थ्य आधारित कार्यक्रमों में उनके विचार और सुझाव लगातार प्रसारित होते रहे हैं। आकाशवाणी पर आयुर्वेद विषयक उनकी वार्ताओं को व्यापक सराहना मिली है। यूट्यूब और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर उनके आयुर्वेद आधारित कार्यक्रमों को लाखों दर्शक देख और पसंद कर चुके हैं, जिससे युवाओं और आम लोगों में आयुर्वेद के प्रति नई रुचि और विश्वास पैदा हुआ है।
कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने कहा कि डॉ. कुरेले का कार्य शिक्षण, सेवा और जन-जागरूकता का संतुलित और प्रेरक उदाहरण है। उनके अनुसंधान, सरल भाषा में समझाने की क्षमता और समाज से जुड़े रहने की प्रवृत्ति ने आयुर्वेद को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि ऐसे सम्मान न केवल व्यक्ति का गौरव बढ़ाते हैं, बल्कि आयुर्वेद और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के प्रति जनता का विश्वास भी मजबूत करते हैं।

पुरस्कार ग्रहण करते हुए डॉ. राजीव कुरेले ने कहा कि यह सम्मान आयुर्वेद के बढ़ते महत्व और विद्यार्थियों की निरंतर मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें आगे भी समाज में आयुर्वेद की वैज्ञानिक उपयोगिता को सरल और सुगम तरीके से पहुँचाने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों की पहचान है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आयुर्वेद आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में तेजी से महत्वपूर्ण स्थान बना रहा है। समाज में बढ़ती स्वीकार्यता और युवाओं की रुचि से यह स्पष्ट हो गया है कि आयुर्वेद अब अध्ययन, उपचार और शोध—तीनों ही स्तरों पर नई दिशा तय कर रहा है।


