हरिद्वार(श्रवण गिरी)।जनपद हरिद्वार के बहादराबाद थाना क्षेत्र और ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र में इन दिनों कथित रिकवरी एजेंटों की दबंगई चरम पर है। हाईवे पर खुलेआम वाहनों को रोककर लोन रिकवरी के नाम पर जबरन कार्रवाई की जा रही है, जिससे आम जनता में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये एजेंट बिना किसी वैध अधिकार के सड़कों पर खड़े होकर वाहनों को रोकते हैं, दबाव बनाते हैं और कई बार वाहन कब्जे में लेने की कोशिश करते हैं। इतना ही नहीं, कई मामलों में वाहन चालकों का पीछा भी किया जाता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
कानूनी प्रावधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
कानून के जानकारों के अनुसार, लोन रिकवरी एक पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया है, जिसे केवल बैंक या अधिकृत संस्था ही निर्धारित नियमों के तहत कर सकती है।
Supreme Court of India ने स्पष्ट रूप से कहा है कि:
किसी भी स्थिति में बलपूर्वक या सड़क पर वाहन रोककर रिकवरी करना गैरकानूनी है।
रिकवरी एजेंट डराने-धमकाने, पीछा करने या जबरन कब्जा लेने जैसी कार्रवाई नहीं कर सकते।
ऐसे मामलों में आरबीआई (Reserve Bank of India) की गाइडलाइन और SARFAESI Act, 2002 के तहत ही कार्रवाई मान्य होती है।
उल्लंघन होने पर संबंधित एजेंट और बैंक दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
चारधाम यात्रा से पहले बढ़ी चिंता
अगले माह से उत्तराखंड में विश्व प्रसिद्ध Char Dham Yatra शुरू होने जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि यही हाल रहा, तो क्या ये एजेंट देवभूमि में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ भी बदसलूकी करेंगे? इससे उत्तराखंड की छवि पर गंभीर असर पड़ सकता है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
रानीपुर झाल क्षेत्र में सक्रिय ऐसे ही एजेंटों के खिलाफ पूर्व में दिल्ली पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। इसके बावजूद इनकी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले ऐसे अवैध रिकवरी एजेंटों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। हाईवे पर अनधिकृत रूप से वाहन रोकने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं, ताकि आम जनता और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
नहीं रुकी मनमानी तो हो सकता है बड़ा हादसा
हाईवे पर फिल्मों की तरह पीछा कर वाहन रोकना कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है।
