मुजफ्फरनगर(हरिशंकर सैनी)। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भोपा रोड स्थित एसडी मैनेजमेंट कॉलेज में आयोजित “मातृशक्ति का अभिनंदन” समारोह उस समय बेहद भावुक और गौरवपूर्ण बन गया, जब समाज सेवा की अनूठी मिसाल पेश करने वाली क्रांतिकारी शालू सैनी को मंच पर सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि उस मानवता का था, जो आज भी समाज में जीवित है। दूसरा कार्यक्रम गवर्मेंट आई टी आई रुड़की रोड पर आयोजन प्रदेश के कौशल विकास राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल द्वारा किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद गीता शाक्या उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया, लेकिन जब मंच से क्रांतिकारी शालू सैनी का नाम पुकारा गया तो पूरे सभागार में तालियों की गूंज देर तक सुनाई देती रही। क्रांतिकारी शालू सैनी को यह सम्मान उनके उस अनोखे और मानवीय कार्य के लिए दिया गया, जिसे करने से कई लोग कतराते हैं। वे उन लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करती हैं, जिनका इस दुनिया में कोई अपना नहीं होता। समाज में अक्सर देखा जाता है कि कई लोग अपनों के अंतिम संस्कार से भी पीछे हट जाते हैं, लेकिन शालू सैनी ऐसे अनजान और लावारिस लोगों को भी सम्मान के साथ अंतिम विदाई देकर मानवता की एक अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं।
जब उन्हें मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया तो कई लोगों की आंखें नम हो गईं। यह पल केवल एक सम्मान का नहीं बल्कि उस संवेदना का था, जो इंसानियत को जीवित रखती है। शालू सैनी ने सम्मान प्राप्त करते हुए बेहद भावुक शब्दों में कहा कि उनके लिए हर लावारिस शव भी किसी की मां, किसी का बेटा, किसी का भाई या किसी की बेटी होता है। इसलिए उन्हें सम्मान के साथ अंतिम विदाई देना ही उनका कर्तव्य है।
मुख्य अतिथि गीता शाक्या ने अपने संबोधन में कहा कि समाज को शालू सैनी जैसी बेटियों पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जहां लोग अपने स्वार्थ में उलझे रहते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों के दुख को अपना समझकर सेवा का मार्ग चुनते हैं। शालू सैनी का कार्य समाज के लिए एक प्रेरणा है।
राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने भी शालू सैनी के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल सेवा नहीं बल्कि सच्ची मानवता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं और हमें उनसे सीख लेनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान कॉलेज परिसर में एक अलग ही भावनात्मक वातावरण देखने को मिला। छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और उपस्थित गणमान्य लोगों ने खड़े होकर तालियों के साथ शालू सैनी के कार्य को सम्मान दिया।
महिला दिवस के इस विशेष अवसर पर दिया गया यह सम्मान केवल एक सम्मान नहीं था, बल्कि समाज को यह संदेश भी था कि इंसानियत अभी जिंदा है और कुछ लोग आज भी मानवता के लिए अपना जीवन समर्पित कर रहे हैं।


