धनौरी(श्रवण गिरी)।गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के कृषि विज्ञान केंद्र, धनौरी, हरिद्वार के तत्वावधान में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत कृषि सखियों हेतु प्राकृतिक खेती पर पांच दिवसीय होने वाले प्रशिक्षण का शुभारंभ करते हुए प्रभारी अधिकारी डॉ० पुरुषोत्तम कुमार द्वारा केंद्र पर उपस्थित आगंतुकों का परिचय कराते हुए केंद्र पर संचालित परियोजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानव जीवन पर आज के समय में रसायन युक्त खेती से पढ़ने वाले प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए मृदा सौरीकरण करने से भूमि में हानिकारक जीवाणुओं को काफी हद तक समाप्त कर फसलों में लगने वाले रोगों एवं सूत्र कृषि से बचाव किया जा सकता है। केंद्र के सह निदेशक डॉ० योगेंद्र पाल सैनी ने प्राकृतिक खेती के चार स्तंभों जीवामृत, बीजामृत, पलवार एवं वापसा के बारे में विस्तृत जानकारी दी। डॉ० विनोद कुमार, प्राध्यापक, सस्य विज्ञान ने कृषि सखियों को रबी मौसम में बोई जाने वाली फसलों के बारे में बताते हुए जानकारी दी तथा भूमि की उर्वरता को कैसे बढ़ाया जा सकता है जिससे फसलों की पैदावार बढ़ोतरी की जा सके। डॉ० नीलकांत, प्राध्यापक, पशु विज्ञान ने प्राकृतिक खेती में देसी गो नस्लों की उपयोगिता को समझाया। कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी ताहिर अली ने कृषि सखियों के समूह के गठन एवं प्राकृतिक खेती से संबंधित विभाग की जानकारी दी। केंद्र के वैज्ञानिक इंजी० उमेश कुमार सक्सेना , अमरेश सिरोही, डॉ० रेनू , फकीरचंद एवं कृषि विभाग के अनिल कुमार मलिक सहित तीन दर्जन कृषकों ने प्रतिभाग किया।


