हरिद्वार(अनिल शीर्षवाल)। लक्सर क्षेत्र के ओसपुर गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने रिश्तों की गरिमा को झकझोर कर रख दिया है। जिस बेटे को सहारा समझकर बुजुर्ग माता-पिता ने अपना जीवन समर्पित किया, उसी ने पत्नी के साथ मिलकर उन्हें घर से बेघर कर दिया।
पीड़ित बुजुर्ग दंपति का आरोप है कि उनका बेटा और बहू आए दिन उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट करते हैं। हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें अपने ही घर में बुनियादी जरूरतों के लिए भी तरसना पड़ रहा है। घर में लगे हैंडपंप से पानी भरने तक की अनुमति नहीं दी जाती, जिससे उनका जीवन अत्यंत कष्टदायक हो गया है।
बुजुर्ग ने बताया कि शुक्रवार को स्थिति और भी दर्दनाक हो गई, जब पुत्रवधू ने उनकी जेब से 10 हजार रुपये निकाल लिए। विरोध करने पर दोनों के साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें घर से बाहर निकाल दिया गया। उम्र के इस पड़ाव पर अपने ही घर से बेघर होना उनके लिए गहरे मानसिक आघात जैसा है।
आंसुओं और बेबसी के साथ बुजुर्ग दंपति सुल्तानपुर पुलिस चौकी पहुंचे और तहरीर देकर सुरक्षा व न्याय की गुहार लगाई।
सुल्तानपुर चौकी प्रभारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है और जांच की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर सवाल खड़ा करती है—क्या आज के दौर में माता-पिता की सेवा और सम्मान सिर्फ शब्दों तक सीमित रह गया है?
