मुजफ्फरनगर(नीति शर्मा)। आज के दौर में जहां कई बार अपने भी साथ छोड़ देते हैं, वहीं क्रांतिकारी शालू सैनी मानवता और संवेदनशीलता की एक अनोखी मिसाल बनकर सामने आई हैं। वर्षों से लावारिस, बेसहारा और अज्ञात मृतकों के अंतिम संस्कार का दायित्व निभा रहीं शालू सैनी अब तक 6000 से अधिक मृतकों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन करा चुकी हैं।
हाल ही में पुरकाजी थाना और ककरौली थाना पुलिस से सूचना मिलने पर दो लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी शालू सैनी ने अपने हाथों में ली। उन्होंने दोनों मृतकों को अपना नाम देकर पूरे सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मोक्षधाम तक पहुंचाया। अंतिम संस्कार की सभी व्यवस्थाएं स्वयं करते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि इंसानियत किसी पहचान, जाति या खून के रिश्ते की मोहताज नहीं होती।

क्रांतिकारी शालू सैनी ने कहा कि दुनिया से विदा होने के बाद हर व्यक्ति सम्मानजनक अंतिम विदाई का हकदार है। यदि किसी असहाय या लावारिस मृतक के अंतिम संस्कार की आवश्यकता हो तो लोग उनसे संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि महादेव की कृपा से वह आगे भी इस सेवा कार्य को निरंतर जारी रखेंगी।
इस सेवा भाव को देखकर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। लोगों ने कहा कि जिन लोगों को जीवनभर कोई अपना नहीं मिला, उन्हें अंतिम विदाई के समय अपना कहने वाला मिल गया। यह कार्य केवल अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है।
शालू सैनी ने समाज के सक्षम लोगों से भी अपील की है कि वे लकड़ी, घी, कफन सामग्री, एम्बुलेंस सेवा अथवा आर्थिक सहयोग के माध्यम से इस पुण्य कार्य में अपनी सहभागिता निभाएं, ताकि बेसहारा और लावारिस लोगों को सम्मानजनक अंतिम विदाई मिल सके।
संपर्क: 8273189764
“मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है” — क्रांतिकारी शालू सैनी


