हरिद्वार(अमित शर्मा)। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पर्यावरणीय जागरुकता एवं मूल्य चेतना प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी डॉ. विनय सेठी ने कहा कि वैश्विक महिला शांति एवं सुरक्षा सूचकांक में 181 देशों के बीच भारत का 131वां स्थान महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में और अधिक गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी, न्याय और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मानकों पर देश को अभी काफी सुधार की जरूरत है।
डॉ. सेठी कनखल स्थित स्वामी हरिहरानंद पब्लिक स्कूल में “महिला सशक्तिकरण” विषय पर आयोजित जागरूकता सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महिलाओं की कम आर्थिक भागीदारी, उनके विरुद्ध हिंसा, न्याय तक पहुंच में कठिनाई, राजनीतिक प्रतिनिधित्व में असमानता तथा लैंगिक भेदभाव जैसी चुनौतियां आज भी महिला सशक्तिकरण के मार्ग में बाधक बनी हुई हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय समावेशन सहित कई क्षेत्रों में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने कहा कि केवल कानूनी अधिकार प्रदान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपलब्ध कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन, सुरक्षित वातावरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता और निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

विद्यालय की प्रधानाचार्य सुश्री हेमा पटेल ने कहा कि भारत की अपेक्षाकृत चिंताजनक रैंकिंग समाज को आत्ममंथन का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने विद्यार्थियों से लैंगिक समानता, सम्मान और संवेदनशीलता को अपने दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में सीनियर विंग कोऑर्डिनेटर बिंदिया अनेजा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि डॉ. विनय सेठी का यह सत्र विद्यार्थियों में जागरूकता, संवेदनशीलता और लैंगिक समानता की समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।



