कार्यशाला में नैना चौहान ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण, अधिकारों और सुरक्षा उपायों की जानकारी रखने का किया आह्वान
हरिद्वार(नीति शर्मा)। छात्राओं को अपने अधिकारों, उपलब्ध सहायता प्रणालियों और सुरक्षा के उपायों की जानकारी होना बेहद आवश्यक है। इसी उद्देश्य से अस्मिता फाउंडेशन की ओर से आयोजित आत्मरक्षा कार्यशाला में छात्राओं को आत्मरक्षा की तकनीकों का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मविश्वास और सतर्कता के साथ अपनी सुरक्षा करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यशाला में प्रशिक्षक नैना चौहान, फर्स्ट रैंक ब्लैक बेल्ट (दक्षिण कोरिया) ने छात्राओं को आत्मरक्षा के व्यावहारिक गुर सिखाए। उन्होंने बताया कि आत्मरक्षा के लिए सही समय पर सही कदम उठाना, परिस्थितियों को समझना और मानसिक रूप से तैयार रहना जरूरी है। किसी भी विपरीत परिस्थिति में घबराने के बजाय सूझबूझ और आत्मविश्वास के साथ उसका सामना करना चाहिए।

प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को विभिन्न आत्मरक्षा तकनीकों की जानकारी दी गई और उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया गया। प्रशिक्षक अमन राजपूत ने भी व्यक्तिगत सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक बालिका को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक होना चाहिए। आत्मरक्षा का प्रशिक्षण न केवल सुरक्षा में सहायक है, बल्कि इससे आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी बढ़ती है।

कार्यक्रम में अस्मिता फाउंडेशन की अध्यक्ष नीता नय्यर, सचिव मानसी मिश्रा, विमलेश गौड़, आरती मेहता, नीरू कौशिक, गौरव काकरान और सुमन अस्थाना सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने बालिकाओं को सशक्त बनाने और उन्हें सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यशाला के माध्यम से छात्राओं को संदेश दिया गया कि आत्मरक्षा केवल एक कौशल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सतर्कता और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अस्मिता फाउंडेशन की यह पहल बालिकाओं को सशक्त बनाने और समाज में महिला सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में सराहनीय प्रयास रही।



