हल्द्वानी(अनिल शीर्षवाल)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को हल्द्वानी में आयोजित ‘कुमाऊं द्वार महोत्सव’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हल्द्वानी कुमाऊं का प्रवेश द्वार होने के साथ ही पर्वतीय समाज की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। महोत्सव में लोगों की बड़ी भागीदारी प्रदेशवासियों के अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से गहरे जुड़ाव को दर्शाती है।
उन्होंने वैदेही कल्चरल एजुकेशन एंड आर्ट फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था लोकगायन और लोकनृत्य के माध्यम से युवा पीढ़ी को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रही है। छोलिया, झोड़ा, चांचरी, बरदा नाटी और न्योली जैसे लोकनृत्य तथा मांगल, चैती और बेड़ा गीत प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के प्रतीक हैं। ढोल, दमाऊ, तुर्री, भंकोरा और रणसिंहा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र भी उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेश का लोक संगीत देश-विदेश में पहचान बना रहा है।
देवभूमि की पहचान और युवाओं का भविष्य प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने, दंगारोधी कानून लागू करने और सशक्त भू-कानून की दिशा में कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, जिससे भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। प्रदेश सरकार राज्य के हित, जनहित और देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए आवश्यक निर्णय लेने से पीछे नहीं हटेगी।

राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष को किया याद
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा गोलीकांड का उल्लेख करते हुए आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए आंदोलनकारियों ने अनेक कठिनाइयों का सामना किया। ऐसे ऐतिहासिक संदर्भों में प्रदेश के लोगों के सम्मान से जुड़ी टिप्पणियां संवेदनशील हो जाती हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए समर्पित व्यक्तित्वों पर राजनीतिक बयान देते समय राष्ट्रहित और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
अंकिता भंडारी प्रकरण पर बोले सीएम धामी
मुख्यमंत्री ने अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी बेटी को न्याय दिलाना समाज और व्यवस्था की गंभीर जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील मामले में तथ्यों, प्रमाणों और न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। न्यायालय की कार्यवाही और कानून के अनुसार होने वाली प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बहन अंकिता को न्याय मिलना सर्वोपरि है। किसी संवेदनशील मामले को राजनीतिक लाभ का माध्यम बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर संवाद किया जाना चाहिए।



