लेखक गांव में पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय महोत्सव का शुभारंभ, देश-विदेश के साहित्यकार और विद्वान हुए शामिल
देहरादून(गौरव कलौनी)। राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने सोमवार को थानों स्थित लेखक गांव में ‘अंतरराष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव-2026’ का शुभारंभ किया। पांच दिवसीय इस महोत्सव में देश-विदेश के साहित्यकार, कलाकार, विद्वान और संस्कृति से जुड़े प्रतिनिधि प्रतिभाग कर रहे हैं।
महोत्सव के उद्घाटन समारोह में राज्यपाल ने कहा कि साहित्य, संस्कृति और कला मानवता को जोड़ने के सशक्त माध्यम हैं। ऐसे आयोजन साहित्यिक सृजन, सांस्कृतिक संवाद और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राज्यपाल ने स्थानीय भाषाओं में साहित्य सृजन, अनुवाद, शोध और प्रकाशन को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिमालय के पर्यावरण, जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण को साहित्यिक विमर्श में प्रमुख स्थान मिलना चाहिए। विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के ज्ञान, संस्कार और सृजनशीलता पर निर्भर करता है। युवाओं में पुस्तकें पढ़ने, मौलिक चिंतन करने, मातृभाषा के प्रति सम्मान और साहित्य के प्रति रुचि विकसित करना जरूरी है। आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता साहित्य के संरक्षण एवं प्रसार में सहायक हो सकती हैं, लेकिन साहित्य की वास्तविक शक्ति मानवीय संवेदना और मौलिक चिंतन में निहित है।

राज्यपाल ने साहित्यकारों से राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनचेतना विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने लेखक गांव की परिकल्पना की सराहना करते हुए इसके संरक्षक एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ और उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि लेखक गांव साहित्यकारों, शोधार्थियों और नवोदित प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच प्रदान करेगा।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने ‘लेखक गांव कॉफी टेबल बुक’ और ‘लेखक गांव सृजन यात्रा 2025-26’ पुस्तकों का विमोचन भी किया।
समारोह में मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन, लेखक गांव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि, रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय भोपाल के कुलाधिपति एवं साहित्यकार संतोष चौबे, ब्रिटेन के प्रवासी साहित्यकार तेजेंद्र शर्मा, लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक सहित देश-विदेश से आए साहित्यकार और विद्वान उपस्थित रहे।



