देहरादून(हरिशंकर सैनी)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड प्रमुख संगठन सम्मेलन-2026 में क्षेत्र पंचायतों को सशक्त बनाने और ब्लॉक प्रमुखों की समस्याओं के समाधान के लिए चार महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने क्षेत्र पंचायत निधि को पुनः प्रारंभ करने, क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय एवं भत्तों में वृद्धि, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की विकासखंड स्तरीय समिति में ब्लॉक प्रमुखों को शामिल करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों को नगरीय क्षेत्रों में शामिल करने से पहले संबंधित ग्राम पंचायतों से विचार-विमर्श करने की घोषणा की।

सोमवार को शासकीय आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों से आए ब्लॉक प्रमुखों एवं जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ब्लॉक प्रमुख और पंचायत प्रतिनिधि सरकार तथा जनता के बीच महत्वपूर्ण सेतु हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में उनकी अहम भूमिका है। सरकार जनप्रतिनिधियों की समस्याओं और मांगों के समाधान के लिए संबंधित विभागों के साथ विचार-विमर्श कर सकारात्मक निर्णय लेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार अंत्योदय की भावना के साथ कार्य कर रही है। सरकार का लक्ष्य विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और जनसमस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के माध्यम से शासन-प्रशासन को सीधे जनता तक पहुंचाया गया है। अभियान के जरिए हजारों लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला और अनेक समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान हुआ।
स्थानीय निकायों को मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रयासरत है। छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुसार राज्य के कर राजस्व में स्थानीय निकायों की हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए अनुपूरक बजट में 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे ग्रामीण एवं शहरी निकायों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। पंचायत भवनों से वंचित ग्राम पंचायतों में भी चरणबद्ध तरीके से भवन निर्माण का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीण रोजगार और पलायन रोकने पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तराखण्ड का लक्ष्य गांवों को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाकर ही हासिल किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे, पर्यटन, कृषि, बागवानी, पशुपालन और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ें। उन्होंने प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत वृद्धि दर्ज होने का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण आजीविका के अवसर बढ़ाने में पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत विकास कार्य करा रही है। केदारखंड और मानसखंड के प्रमुख मंदिरों के विकास के साथ कॉरिडोर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित कर पर्यटन गतिविधियों के विस्तार और स्थानीय लोगों को वर्षभर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी अभियान के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की बात कही। उन्होंने किसानों, वरिष्ठ नागरिकों, सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों सहित समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं का भी उल्लेख किया।
सम्मेलन में ब्लॉक प्रमुख संगठन उत्तराखण्ड के प्रदेश अध्यक्ष राजीव कण्डारी, महासचिव गणेश चन्दोला, श्रीमती ज्योति ग्रोवर, संरक्षक हरीश बिष्ट सहित विभिन्न क्षेत्रों के ब्लॉक प्रमुख एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।




