हरिद्वार(श्रवण गिरी)। कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी, हरिद्वार में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की स्थापना एवं संचालन विषय पर चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनपद के किसानों को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली से संबंधित तकनीकी एवं व्यवहारिक जानकारी विस्तार से प्रदान की गई।
केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जल एक सीमित प्राकृतिक संसाधन है, जिसका उपयोग अब अत्यंत सोच-समझकर करना आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि पानी के बेहतर उपयोग, फसल उत्पादकता में वृद्धि तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को कृषि में अपनाना आज समय की मांग बन चुका है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक इंजीनियर उमेश कुमार सक्सेना ने अपने तकनीकी व्याख्यान में बताया कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली एक उन्नत तकनीक है, जिसके माध्यम से कम दबाव पर पानी की सीमित मात्रा सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाई जाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के उपयोग से 40 से 70 प्रतिशत तक पानी की बचत के साथ ऊर्जा एवं मजदूरी लागत में कमी आती है, वहीं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के साथ 30 से 40 प्रतिशत तक उपज में वृद्धि संभव है। उन्होंने ड्रिप, स्प्रिंकलर एवं रेन गन जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों की तकनीकी जानकारी भी किसानों को दी।

प्रशिक्षण के दौरान प्राकृतिक खेती, उन्नत सब्जी उत्पादन, पशुपालन एवं पॉलीहाउस में सब्जी उत्पादन जैसे समसामयिक कृषि विषयों पर भी विशेषज्ञों ने चर्चा की। कार्यक्रम में केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नीलकंठ, डॉ. योगेंद्र पाल सैनी, डॉ. विनोद, श्रीमती अमरेश, डॉ. रेनू, डॉ. सरिता, डॉ. आशीष मलिक एवं डॉ. स्वतंत्र प्रताप सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान सत्येंद्र त्यागी एवं सुभाष सहित उद्यान विभाग के कर्मचारी आबिद अली, शशि भूषण, अमन तथा क्वांटम विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के छात्र-छात्राओं सहित लगभग 108 प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय सूक्ष्म सिंचाई मिशन, उत्तराखंड द्वारा वित्त पोषित था।




