बहादराबाद में नवरात्रि के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन, भारतीय परंपराओं और आपसी सौहार्द का दिया संदेश
हरिद्वार(मनोज यादव)। नवरात्रि के पावन अवसर पर राजकमल साइंस एंड मैनेजमेंट कॉलेज, बहादराबाद में डांडिया एवं गरबा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे छात्र-छात्राओं ने गरबा और डांडिया की मनमोहक प्रस्तुतियों से महाविद्यालय परिसर को उत्सव के रंगों से सराबोर कर दिया। संगीत की मधुर धुनों और लयबद्ध नृत्य प्रस्तुतियों के बीच पूरे परिसर में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम में दिव्या, अंबिका, अवंतिका, वंशिका, रितिका, पूर्णिमा, खुशी, इशिका और अंशिका सहित अनेक छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। छात्राओं की आकर्षक वेशभूषा, शानदार तालमेल और ऊर्जावान प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिला।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राघवेंद्र चौहान ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ उनमें एकता, सहयोग और आपसी सौहार्द की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता हमारी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है। त्योहार आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश देते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों का समावेश विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. दीपा के निर्देशन में सहयोगी शिक्षकों सिया पाल, प्रिया सैनी, अरबाब राव, समीक्षा, विशाखा, सोनिया सारस्वत और भव्या के सहयोग से किया गया। शिक्षकों और विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों से महोत्सव उत्साहपूर्ण और यादगार बना।

इस अवसर पर राजकमल कॉलेज की सचिव राजेश देवी, प्रबंध समिति के सदस्य दुष्यंत प्रताप एवं नितिन प्रताप सहित डॉ. दीक्षा चौहान, डॉ. नीरज शर्मा, डॉ. अनिरुद्ध कुमार, प्रवीण कुमार, अजय कुमार, रवि कुमार, दुष्यंत कुमार और राजदेव रावत उपस्थित रहे।
महोत्सव का समापन उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक एकता के संदेश के साथ हुआ। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शिक्षा के साथ संस्कृति और संस्कारों का समन्वय विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य तथा सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।



