हरिद्वार(श्रवण गिरी)। जनपद हरिद्वार के विकासखंड रुड़की की ग्राम पंचायत धनौरी में मनरेगा योजना के तहत पशुशेड निर्माण के नाम पर कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्राम विकास अधिकारी निर्मल सैनी के विरुद्ध जिलाधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर सरकारी धन के दुरुपयोग और कथित फर्जी बिलों के माध्यम से भुगतान दर्शाए जाने की जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में संबंधित दस्तावेज भी सौंपे हैं।
पशुशेड निर्माण के नाम पर 50,460 रुपये के बिल फीड करने का आरोप
जिलाधिकारी हरिद्वार को 2 नवंबर 2026 को दिए गए शिकायती पत्र में जनीष पुत्र संदीप सैनी ने आरोप लगाया है कि उनके पिता संदीप पुत्र हरफूल सिंह के नाम पर मनरेगा योजना के अंतर्गत पशुशेड निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ था। शिकायत के अनुसार, 10 मई 2025 को मनरेगा पोर्टल पर निर्माण सामग्री के नाम पर कुल 50,460 रुपये के बिल फीड किए गए, जबकि मौके पर पशुशेड का निर्माण नहीं कराया गया और न ही संबंधित सामग्री प्राप्त हुई।
शिकायतकर्ता ने बिलों का विवरण देते हुए बताया कि ईंट के नाम पर 29,925 रुपये, सीमेंट के नाम पर 7,128 रुपये, कोर्सेंट के नाम पर 974.16 रुपये, जीआई शीट के नाम पर 3,000 रुपये, रेत के नाम पर 3,825 रुपये, बजरी के नाम पर 1,968 रुपये तथा अन्य सामग्री के नाम पर 3,140 रुपये और 500 रुपये दर्शाए गए हैं। इन बिलों के आधार पर कुल 50,460 रुपये की सामग्री का हिसाब दर्ज किए जाने का आरोप लगाया गया है।
मजदूरी के भुगतान और सामग्री की आपूर्ति पर उठाए सवाल
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने संबंधित ग्राम विकास अधिकारी से बिलों के संबंध में जानकारी मांगी तो उन्हें बताया गया कि ये बिल सरकारी ठेकेदार के हैं और सामग्री की धनराशि सरकारी खाते में जाती है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पशुशेड निर्माण के नाम पर 11,836 रुपये मजदूरी के रूप में दिए गए, जबकि सामग्री की आपूर्ति और शेष धनराशि के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं हुई।
अधिकारी पर धमकाने का भी आरोप
शिकायत में ग्राम विकास अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि अनियमितताओं की शिकायत करने की बात कहने पर अधिकारी ने कथित तौर पर आईजीओ और मनरेगा लोकपाल सहित विभिन्न स्तरों पर अपनी पहुंच होने की बात कही। शिकायतकर्ता के अनुसार, अधिकारी ने कथित रूप से कार्रवाई की परवाह न होने और वीआरएस लेकर निकल जाने जैसी बातें भी कहीं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भौतिक सत्यापन कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मनरेगा पोर्टल पर दर्ज बिलों, भुगतान अभिलेखों, सामग्री आपूर्ति से संबंधित दस्तावेजों और निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया है।
इसके साथ ही शिकायत में मांग की गई है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता, फर्जी बिलिंग या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब देखना होगा कि जिलाधिकारी स्तर से इस शिकायत पर क्या संज्ञान लिया जाता है और जांच में कथित अनियमितताओं को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।





