देहरादून(अनिल शीर्षवाल)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ का शुभारंभ तथा ‘विकसित उत्तराखण्ड विजन-2047’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों महत्वपूर्ण पहलों से प्रदेश में सुशासन को मजबूती मिलेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही, वर्ष 2047 तक उत्तराखण्ड को विकसित राज्य बनाने के लिए दीर्घकालिक विकास की दिशा निर्धारित होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की सफलता का वास्तविक पैमाना केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। कई बार जानकारी के अभाव में पात्र लोग सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते। वहीं, नागरिकों को एक ही जानकारी के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने और विभिन्न विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। देवभूमि परिवार पोर्टल से इन समस्याओं को कम करने और सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने में मदद मिलेगी।

प्रत्येक परिवार को मिलेगी विशिष्ट डिजिटल आईडी
प्रमुख सचिव नियोजन डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि देवभूमि परिवार पोर्टल का उद्देश्य प्रदेश के सभी परिवारों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है। पोर्टल पर पंजीकरण के बाद प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट ‘देवभूमि परिवार आईडी’ प्रदान की जाएगी। इससे परिवारों और उनके सदस्यों की जानकारी एक स्थान पर उपलब्ध होगी। सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान करने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी सहायता मिलेगी। इसके संचालन के लिए राज्य स्तर पर देवभूमि परिवार प्राधिकरण तथा जिला स्तर पर जिला देवभूमि परिवार अधिकारी की व्यवस्था प्रस्तावित है।
2047 तक 28 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के आह्वान से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित उत्तराखण्ड विजन-2047’ केवल लक्ष्यों का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास की कार्ययोजना है। इसमें लगभग 440 संकेतकों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
प्रमुख सचिव नियोजन के अनुसार, वर्ष 2047 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लगभग 28 लाख करोड़ रुपये और प्रति व्यक्ति आय को लगभग 20 लाख रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त बेरोजगारी दर को 3.5 प्रतिशत तथा बहुआयामी गरीबी को 0.61 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सड़क, रेल और पर्यटन परियोजनाओं को मिल रही गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश में सड़क, रेल, हवाई संपर्क और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और चारधाम सड़क परियोजना से कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है।
श्री केदारनाथ और श्री बदरीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्यों के साथ मानसखंड मंदिर माला मिशन तथा अन्य धार्मिक पर्यटन परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। शीतकालीन यात्रा के माध्यम से प्रदेश में वर्षभर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

तीन लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में औद्योगिक निवेश, स्वरोजगार और स्टार्टअप को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने के साथ स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी योजना के जरिए आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। प्रदेश की तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था डेढ़ गुना से अधिक बढ़ चुकी है। पिछले एक वर्ष में प्रदेश की जीएसडीपी में 7.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, प्रति व्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की वृद्धि और रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी राज्य में हो रहे सकारात्मक बदलावों को दर्शाती है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ होगा विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड का विकास मॉडल ‘प्रकृति के साथ प्रगति’ पर आधारित होना चाहिए। हिमालय, नदियां, वन संपदा और सांस्कृतिक विरासत प्रदेश की पहचान हैं। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य होने के कारण प्रत्येक विकास योजना में पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
विजन के तहत वर्ष 2047 तक राज्य की स्थापित ऊर्जा क्षमता को लगभग 22 हजार मेगावाट और वन आच्छादन को 46.6 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कौशल विकास, कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करने और योजनाओं का समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी एवं खजान दास, विधायक सविता कपूर, सेतु आयोग के सलाहकार दिनेश अग्रवाल, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सेतु आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, नीति आयोग की कार्यक्रम निदेशक डॉ. सोनिया पंत, आदित्य कुमार सहित जनप्रतिनिधि एवं शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। विभिन्न जनपदों के जिलाधिकारी और जिला स्तरीय अधिकारी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।





