हरिद्वार(नीति शर्मा)।डिवाइन कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज परिसर में डिवाइन इंटरनेशनल फाउंडेशन एवं टीसीपीएल (TCPL) के इनिशिएटिव के अंतर्गत संचालित स्टिचिंग एवं सॉफ्ट टॉय मेकिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया गया। इस अवसर पर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए तथा उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सिलाई मशीनों का वितरण किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा समाज में आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में टीसीपीएल के जीएम संदीप श्रीवास्तव उपस्थित रहे। उनके साथ टीसीपीएल के एचआर हेड अमित पांडे, डिवाइन कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज की निदेशिका अनुभा मदान, एचआर हेड आभा राय, बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर परितोष शर्मा, यूनिटी अकाउंटेंट कृष्ण पंवार तथा विनीत विशेष रूप से उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि संदीप श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में कौशल आधारित प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि युवाओं और महिलाओं को सही दिशा में प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं बल्कि समाज और परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि टीसीपीएल समाज में कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार की पहल करता रहा है और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम जारी रहेंगे।
टीसीपीएल के एचआर हेड अमित पांडे ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को सिलाई और सॉफ्ट टॉय मेकिंग जैसे उपयोगी कौशल सीखने का अवसर मिला है, जिससे वे स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि वे इस कौशल को निरंतर अभ्यास के साथ आगे बढ़ाती हैं तो यह उनके लिए आय का एक अच्छा माध्यम बन सकता है।

डिवाइन कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज की निदेशिका अनुभा मदान ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि डिवाइन कॉलेज हमेशा से ही शिक्षा के साथ-साथ समाज सेवा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी सक्रिय रहा है। उन्होंने कहा कि डिवाइन इंटरनेशनल फाउंडेशन के माध्यम से इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सिलाई (स्टिचिंग) और सॉफ्ट टॉय मेकिंग की विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी गई। उन्हें कपड़े की कटिंग, डिजाइनिंग, सिलाई और फिनिशिंग से जुड़ी बारीकियों को विस्तार से सिखाया गया, ताकि वे इस कौशल का उपयोग कर स्वयं का कार्य शुरू कर सकें। प्रशिक्षकों द्वारा यह भी बताया गया कि तैयार किए गए उत्पादों को बाजार में आकर्षक तरीके से प्रस्तुत कर किस प्रकार स्वरोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
समापन समारोह के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए तथा उन्हें सिलाई मशीनें वितरित की गईं। सिलाई मशीनें प्राप्त कर प्रतिभागियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने इस पहल के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उन्हें घर से ही रोजगार शुरू करने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने प्रतिभागियों के उत्साह और मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कौशल विकास कार्यक्रम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं तो उसका सीधा प्रभाव पूरे परिवार और समाज के विकास पर पड़ता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया तथा भविष्य में भी इसी प्रकार के कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, प्रशिक्षु एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।


