रुड़की(ब्यूरों)। आज के दौर में जहां अक्सर यह चर्चा होती है कि बेटियां विवाह के बाद अपने मायके से दूर हो जाती हैं, वहीं रुड़की की एक घटना ने समाज को भावुक और प्रेरित करने वाला संदेश दिया है। आवास विकास, रुड़की निवासी 87 वर्षीय कामिनी श्रीवास्तव का निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही उनकी दोनों बेटियां कविता और संगीता, जो ऑस्ट्रेलिया में अपना सफल व्यवसाय संचालित करती हैं, हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर अपनी मां के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार के लिए रुड़की पहुंच गईं।
कामिनी श्रीवास्तव की केवल दो बेटियां हैं और कोई पुत्र नहीं है। ऐसे में दोनों बेटियों ने समाज की परंपरागत धारणाओं को पीछे छोड़ते हुए अपनी मां के प्रति कर्तव्य और सम्मान का परिचय दिया। उन्होंने न केवल अंतिम संस्कार की सभी जिम्मेदारियां निभाईं, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि माता-पिता की सेवा, सम्मान और अंतिम संस्कार का दायित्व बेटा और बेटी दोनों समान रूप से निभा सकते हैं।
इस घटना ने समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया है कि बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं और परिवार के प्रति अपने दायित्वों को भी पूरी निष्ठा से निभा रही हैं। कविता और संगीता का यह कदम उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो आज भी बेटा-बेटी में भेदभाव की सोच रखते हैं।
स्थानीय लोगों ने दोनों बेटियों के इस समर्पण और मातृभक्ति की सराहना करते हुए कहा कि यह उदाहरण समाज में बेटियों के महत्व और उनके संस्कारों को दर्शाता है। मां के प्रति प्रेम, सम्मान और कर्तव्य का यह भाव निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बनेगा।
