हरिद्वार(ब्यूरों)। शहर स्थित कमलदास कुटिया में देर रात आश्रम के सेवक एवं पैरोकार राजीव गिरी पर हुए हमले से सनसनी फैल गई। घटना उस समय हुई जब राजीव गिरी आश्रम के महंत ओमप्रकाश शास्त्री के साथ नैनीताल उच्च न्यायालय में लंबित मुकदमे को लेकर चर्चा कर रहे थे। आरोप है कि आश्रम के एक शिष्य और उसके साथ आए कई लोगों ने अचानक महंत एवं राजीव गिरी को घेर लिया और मारपीट शुरू कर दी।
हमले में राजीव गिरी गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को उपचार एवं मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया। पुलिस ने हमलावरों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, आश्रम में हाल ही में हुई चादरपोशी के बाद से आंतरिक विवाद गहराया हुआ है। घटना को आश्रम की संपत्ति और व्यवस्थाओं को लेकर चल रहे विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ लोग आश्रम की परिसंपत्तियों पर कब्जा जमाने के प्रयास में सक्रिय हैं।
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक कुंदन सिंह राणा ने बताया कि घटना की सूचना डायल-112 के माध्यम से मिली थी। मामले की जांच की जा रही है तथा आरोपियों के खिलाफ जल्द कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद आश्रम परिसर और आसपास पुलिस चौकसी बढ़ा दी गई है।
उल्लेखनीय है कि कमलदास कुटिया लंबे समय से विभिन्न विवादों के कारण चर्चा में रही है। आश्रम की संपत्तियों, बकाया किराये और प्रशासनिक मामलों को लेकर न्यायालय में वाद भी लंबित है। ऐसे में ताजा हमला आश्रम के भीतर चल रहे अंतर्विरोधों को एक बार फिर सार्वजनिक कर गया है।
पहले से विवादित रहा है आश्रम
उत्तर प्रदेश शासन के अधीन रहते कानून व्यवस्था बेहतर करने के लिए आश्रम में पुलिस लाइन स्थापित की गई थी। वर्ष 1908 में स्थापित पुलिस लाइन के एवज में तत्कालिन उत्तर प्रदेश शासन ने 1989 से किराया देना शुरू कर दिया। यह किराया आश्रम को 1997 तक मिलता रहा। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से यह किराया अब तक बकाया चला आ रहा है। हालत यह है कि पुलिस और प्रशासन का पूरा सिस्टम अब रोशनाबाद में शिफ्ट हो चुका है, लेकिन आश्रम में यातायात पुलिस और कई पुलिसकर्मियों का अब तक कब्जा चला आ रहा है। इस मामले को लेकर आश्रम ने उच्च न्यायालय नैनीताल में वाद दायर किया है। बताते हैं कि वर्तमान में शासन पर आश्रम का किराया बकाया चल रहा है। मारपीट और कब्जे के प्रयास जैसी गतिविधियां इन्हीं पैसे और परिसंपत्तियों को कब्जा करने के लिए बार-बार सामने आ रही हैं। महंत ओमप्रकाश शास्त्री वृद्ध हो चले हैं, करीब 93 वर्ष के महंत सेवकों से अपने कार्य कराते हैं। आश्रम की व्यवस्था को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं।
संपत्ति विवाद और आंतरिक कलह
कमलदास कुटिया में हुआ यह हमला आश्रम के भीतर चल रहे संपत्ति विवाद की ओर इशारा करता है। यह घटना आश्रम की आंतरिक कलह को भी सामने लाती है। पुलिस फिलहाल हमलावरों की गिरफ्तारी की कार्रवाई में जुटी है। वहीं मुकामी रिपोर्टिंग चौकी पुलिस पूरे प्रकरण की जांच में जुटी है। सेवक राजीव गिरी ने दिए तहरीर में लिखा है कि आश्रम के भीतर के अंतर्विरोधों को सुलझाने की आवश्यकता है। अन्यथा तमाम बाहरी तत्व और कब्जा जमाए बैठे लोग इसको खुर्दबुर्द करने की जुगत में हैं।
