धनौरी(श्रवण गिरी)। खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत ग्राम इब्राहिमपुर देह में किसान जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों तथा फसल अवशेष प्रबंधन के विषय में वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की गई।
विशेषज्ञों ने कहा कि स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित जल संसाधन एवं संतुलित पोषण प्रबंधन ही टिकाऊ और लाभकारी कृषि की आधारशिला हैं। गोष्ठी को संबोधित करते हुए भूमि संरक्षण अधिकारी मोहम्मद ताहिर अली ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड एवं मृदा परीक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, उत्पादन लागत कम होती है तथा मिट्टी की उर्वराशक्ति लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।
उन्होंने किसानों से प्रत्येक फसल चक्र के अनुसार नियमित रूप से मृदा परीक्षण कराने तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड की संस्तुतियों का पालन करने का आह्वान किया।
कृषि विज्ञान केंद्र, धनौरी के वैज्ञानिक इंजीनियर उमेश कुमार सक्सेना ने कहा कि वर्तमान समय में मिट्टी की गिरती गुणवत्ता, बढ़ती उत्पादन लागत तथा जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों का समाधान वैज्ञानिक एवं संसाधन संरक्षण आधारित खेती को अपनाकर ही संभव है।
उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा जैविक एवं रासायनिक स्रोतों के संतुलित प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि उर्वरकों का असंतुलित प्रयोग न केवल मिट्टी की सेहत को प्रभावित करता है, बल्कि फसल उत्पादन की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

जल संरक्षण को समय की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने किसानों को ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सीमित जल संसाधनों के बीच अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए जल उपयोग दक्षता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।
गोष्ठी में फसल अवशेष प्रबंधन पर विशेष चर्चा करते हुए बताया गया कि पराली एवं अन्य फसल अवशेषों को जलाने से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं तथा पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। इसके विपरीत फसल अवशेषों का खेत में ही वैज्ञानिक प्रबंधन एवं अपघटन करने से नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश सहित अनेक पोषक तत्व पुनः मिट्टी में उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की जैविक कार्बन मात्रा, जलधारण क्षमता एवं उर्वरता में वृद्धि होती है।
किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित कृषि यंत्रों एवं नवीन तकनीकों की भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम में उद्यान विभाग के अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं एवं बागवानी संबंधी जानकारी साझा की, जबकि इफको के प्रतिनिधियों ने संतुलित उर्वरक उपयोग, नैनो उर्वरकों तथा किसानों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी।
गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने किसानों से मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल बचत, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं फसल अवशेष प्रबंधन को अपनी खेती का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया, ताकि कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सके।





