धनौरी(श्रवण गिरी)। कलियर विधानसभा क्षेत्र के धनौरी में आगामी 7 सितंबर को आयोजित होने वाले रोजगार मेले से पहले भाजपा की स्थानीय राजनीति को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। रोजगार मेले के प्रचार-प्रसार के लिए लगाए गए होर्डिंग और बैनरों में भाजपा के स्थानीय पदाधिकारियों को लेकर दिखाई गई प्राथमिकता अब कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।
धनौरी स्थित महर्षि दयानंद मेडिकल साइंस एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट परिसर में स्वराज फाउंडेशन की ओर से रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार मेले में देश के विभिन्न राज्यों से करीब 35 से 40 कंपनियां भाग लेंगी और लगभग एक हजार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि कार्यक्रम से अधिक चर्चा उसके प्रचार बैनरों की हो रही है। क्षेत्र में लगाए गए बैनरों में कलियर विधानसभा के भाजपा विधानसभा संयोजक मुनीष सैनी का न तो नाम दिखाई दे रहा है और न ही उनका फोटो लगाया गया है। वहीं भाजपा मंडल अध्यक्ष की तस्वीर तो बैनरों में मौजूद है, लेकिन उनके नाम का उल्लेख नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में स्थानीय संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों को प्रतिनिधित्व दिए जाने की अपेक्षा रहती है। ऐसे में विधानसभा संयोजक का पूरी तरह गायब होना और मंडल अध्यक्ष के नाम का उल्लेख न होना कई तरह की अटकलों को जन्म दे रहा है।
कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा भी तेज है कि आखिर प्रचार सामग्री तैयार करते समय किन मानकों के आधार पर नाम और फोटो शामिल किए गए और किन्हें नजरअंदाज किया गया। कुछ लोग इसे संगठन के भीतर संभावित खींचतान या गुटबाजी से जोड़कर देख रहे हैं, हालांकि भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल रोजगार मेले का उद्देश्य युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है, लेकिन कार्यक्रम से पहले ही प्रचार बैनरों को लेकर उठे सवालों ने कलियर विधानसभा की राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ा दी हैं। अब सभी की नजरें 7 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम पर टिकी हैं कि मंच पर स्थानीय संगठन के कौन-कौन से पदाधिकारी दिखाई देते हैं और बैनरों को लेकर उठे सवालों पर कोई स्पष्टीकरण सामने आता है या नहीं।
