तत्कालीन डीएम कर्मेंद्र सिंह पर मेजर पनिशमेंट की सिफारिश, 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश
देहरादून(अनिल शीर्षवाल)। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। शासन ने हरिद्वार के तत्कालीन नगर आयुक्त एवं आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी की सेवा से बर्खास्तगी की संस्तुति करते हुए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ मेजर पनिशमेंट (दीर्घ शास्ति) की संस्तुति की गई है।
शासन ने कर्मेंद्र सिंह की दो वेतनवृद्धियां तीन वर्षों तक रोकने की सिफारिश की है। इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परिनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने की संस्तुति उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को भेजी गई है। प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में यह पहला अवसर माना जा रहा है जब किसी आईएएस अधिकारी के खिलाफ बर्खास्तगी की संस्तुति की गई है।
मामले में छह सरकारी कार्मिकों और चार निजी व्यक्तियों सहित कुल 10 लोगों के खिलाफ अभियोग दर्ज करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज होगा उनमें तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, सहायक अभियंता आनंद सिंह मिश्राण, संपत्ति लिपिक वेदपाल और मानचित्रकार दिनेश कांडपाल शामिल हैं। वहीं भूमि विक्रेता एवं संबंधित व्यक्तियों में सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह के नाम शामिल हैं।
क्या है पूरा मामला
हरिद्वार के जगजीतपुर क्षेत्र में नगर निगम की भूमि रिंग रोड परियोजना की जद में आने पर निगम को 60 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा प्राप्त हुआ था। आरोप है कि इस धनराशि से 33 बीघा कृषि भूमि का भूमि उपयोग परिवर्तन कर उसे व्यावसायिक श्रेणी में दर्शाया गया और उसका सर्किल रेट बढ़ाया गया। इसके बाद बढ़े हुए सर्किल रेट के आधार पर तीन किसानों से लगभग 54 करोड़ रुपये में भूमि खरीद ली गई।
मामला सामने आने के बाद सरकार ने इसकी प्रारंभिक जांच कराई थी। जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर गत वर्ष जून में तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी, एसडीएम अजयवीर सिंह सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच के आधार पर अब कठोर कार्रवाई की गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि हैं तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।
क्या होती है दीर्घ शास्ति
दीर्घ शास्ति सरकारी सेवा में दी जाने वाली गंभीर अनुशासनात्मक सजा है। इसके अंतर्गत सेवा से हटाना, अनिवार्य सेवानिवृत्ति, पदावनति अथवा वेतनवृद्धि रोकना जैसे दंड शामिल होते हैं। कर्मेंद्र सिंह के मामले में शासन ने दो वेतनवृद्धियां रोकने की संस्तुति की है।




