हरिद्वार(अनिल शीर्षवाल)। हर्ष विद्या मंदिर कॉलेज, रायसी के जंतु विज्ञान विभाग एवं कृभको के संयुक्त तत्वावधान में किसानों एवं छात्र-छात्राओं में जैविक खाद, जैव उर्वरक, मृदा स्वास्थ्य तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से किसान सभा, एक दिवसीय संगोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. के. पी. सिंह, सचिव एवं ब्लॉक प्रमुख डॉ. हर्ष कुमार दौलत, प्राध्यापक डॉ. अजीत कुमार राव, मुख्य अतिथि अनीश अहमद अंसारी तथा कृभको अधिकारी नितेश राजपूत ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में जंतु विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. नेहा सिंह ने अतिथियों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों, किसानों एवं छात्र-छात्राओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम किसानों, विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों के बीच ज्ञान एवं अनुभव के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
मुख्य अतिथि अनीश अहमद अंसारी ने जैविक खाद एवं जैविक कृषि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैविक खाद के उचित उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता बनाए रखने में सहायता मिलती है। उन्होंने किसानों को संतुलित एवं वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों के प्रयोग के लिए प्रेरित किया।
रसायन विज्ञान विभाग की डॉ. अलका ने कृषि में रासायनिक उर्वरकों के संतुलित प्रयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का आवश्यकता से अधिक एवं असंतुलित प्रयोग मृदा, जल और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने किसानों को उर्वरकों की सही मात्रा, सही समय और उचित विधि से उपयोग करने के लिए जागरूक किया।
कृभको अधिकारी एवं कार्यक्रम आयोजक नितेश राजपूत ने जैविक खाद एवं जैव उर्वरकों के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि ये टिकाऊ कृषि व्यवस्था को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने किसानों को कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ मृदा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित किया।
वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. नरेंद्र कुमार ने जैविक उर्वरकों, मृदा स्वास्थ्य एवं फसलों के पोषण विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण फसल उत्पादन का आधार है। उन्होंने संतुलित उर्वरक प्रबंधन एवं जैविक पदार्थों के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान किसानों एवं छात्र-छात्राओं ने विशेषज्ञों से कृषि, जैविक खाद, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरकों से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने उनके प्रश्नों का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया।
कार्यशाला में किसानों, छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों को मृदा संरक्षण, स्वच्छ पर्यावरण तथा टिकाऊ कृषि के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के आयोजन में कृभको के नितेश राजपूत तथा हर्ष विद्या मंदिर कॉलेज की डॉ. नेहा सिंह एवं रश्मि नौटियाल का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. प्रकृति द्विवेदी, दीपक कुमार एवं डॉ. वर्षा रानी का भी सहयोग रहा। इस अवसर पर डॉ. प्रियंका सैनी, डॉ. मंजू रानी, डॉ. हेमंत, डॉ. प्रदीप, डॉ. ललित मोहन, डॉ. मनोज, डॉ. स्मृति, डॉ. शिल्पी सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
अंत में जंतु विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर रश्मि नौटियाल ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, किसानों, छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। उपस्थित प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से कृषि एवं पर्यावरण से जुड़े विषयों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने में सहायता मिलती है।





