धनौरी(श्रवण गिरी)। कृषि विज्ञान केंद्र, धनौरी द्वारा उद्यान विभाग हरिद्वार के वित्तीय सहयोग से “उद्यानिकी उद्यमिता विकास” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। 29 मई से 1 जून 2026 तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनपद के 50 प्रतिभागियों ने भाग लेकर आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों एवं कृषि आधारित उद्यमों की जानकारी प्राप्त की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक एवं कृषि अभियंता इंजीनियर उमेश कुमार सक्सेना ने संरक्षित खेती की उन्नत तकनीकों पर विस्तार से जानकारी देते हुए पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई एवं पॉलीमल्चिंग के लाभ बताए। उन्होंने जल एवं पोषक तत्वों के कुशल प्रबंधन के माध्यम से उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने के उपायों पर प्रकाश डाला तथा विभिन्न राज्यों में सफल संरक्षित खेती मॉडलों का वीडियो प्रदर्शन कर प्रतिभागियों को प्रेरित किया। उन्होंने मशरूम उत्पादन एवं मधुमक्खी पालन को आय बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण उद्यमों के रूप में अपनाने की सलाह दी।
डॉ. रेनू ने उन्नत सब्जी उत्पादन, गुणवत्तायुक्त बीज चयन, पौध प्रबंधन, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन तथा मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी। वहीं डॉ. वाई.पी. सैनी ने प्राकृतिक खेती, जैविक आदानों के उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संतुलित उर्वरक प्रबंधन की आवश्यकता बताई।

समापन सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने कहा कि संरक्षित खेती, मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन जैसे उद्यम ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने के प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को व्यवहारिक रूप से अपनाकर उद्यमिता एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. नीलकांत, डॉ. अमरेश सिरोही एवं डॉ. सरिता ने भी तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। उद्यान विभाग के कर्मचारी अंशु शर्मा, आबिद अली, जितेंद्र कुमार तथा प्रगतिशील कृषक सत्यपाल, मांगेराम और ऋषभ सैनी ने भी अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को ज्ञानवर्धक एवं कृषि आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाला बताया।



